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Bihar

कितना करीब लाएगा कॉरिडोर/ पाक सेना के रुख से तय होगा

November 29, 2018 05:49 AM

COURTESY NBT NOV 29

कितना करीब लाएगा कॉरिडोर/ पाक सेना के रुख से तय होगा


पाकिस्तान की तमाम कोशिशों के बीच उसका पुराना रेकॉर्ड भारत को विश्वास करने से रोकता है। दरअसल 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी और नवाज शरीफ ने दिल्ली और लाहौर के बीच एक दोस्ताना बस चलाई थी। ऐसा लगा कि सालों से पड़ी दुश्मनी की परतें हटने वाली हैं लेकिन तभी पाकिस्तान ने करगिल में जंग के हालात बना दिए। रिश्तों में सुधार के बजाय दोनों देशों के बीच करगिल युद्ध हो गया।
करतारपुर कॉरिडोर से भारत-पाक रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलने की आस!
Narendra.Mishra

@timesgroup.com
•नई दिल्ली : क्या करतारपुर कॉरिडोर से भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में चली आ रही तनातनी कम होगी/ क्या दोनों देशों के करतारपुर कॉरिडोर के मुद्दे पर साथ आने के बाद आगे के लिए उम्मीद की रोशनी दिखने लगी है/ उम्मीदों से भरे ऐसे सवाल तब उठे जब सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु नानक देवजी की 550वीं जयंती के मौके पर भारत-पाक ने श्रद्धालुओं के लिए पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब के दर्शन करने के लिए अपने-अपने इलाकों में न सिर्फ कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया, बल्कि पाक ने अपने यहां हुए आयोजन में भारत के नेताओं को भी न्योता दे दिया।

इमरान खान के सत्ता संभालने के बाद यह पड़ोसी देश की ओर से भारत के साथ पहली सकारात्मक पहल थी, जिसे भारत ने भी स्वीकारा और दो मंत्रियों को भी पाकिस्तान भेजा। वहीं पंजाब सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू भी पाकिस्तान गए। हालांकि इन घटनाक्रमों के बीच अब भी इस कवायद के दूरगामी असर पर संदेह बरकरार है। जानकारों के अनुसार भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्तों की कठोरता को पिघलाना इतना आसान नहीं है। दरअसल, 2016 में उरी हमले और उसके बाद सर्जिकल स्ट्राइक के बाद दोनों देशों के संबंध लगातार खराब होते चले गए। ऐसे में दो साल में पहली बार कोई सकारात्मक पहल देखी जा रही है।

कोशिश का दौर जारी रहा : करतारपुर कॉरिडोर से पहले भी इमरान खान ने सत्ता संभालने के तुरंत बाद भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर बातचीत का रास्ता खोलने का आग्रह किया था। सार्क बैठक में शामिल होने के लिए भी इमरान सरकार ने पीएम मोदी से आग्रह किया। हालांकि इन पहल के बीच पाकिस्तान का दूसरा चेहरा हमेशा सामने आता रहा। बावजूद इसके करतारपुर के रूप में एक ऐसा भावनात्मक मुद्दा सामने आया, जिसपर दोनों देशों ने सकारात्मक रुख दिखाया। पाकिस्तान ने जहां कई वर्षों की मांग को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

वहीं, भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने करतारपुर की तुलना बर्लिन की दीवार से करके संकेत दिया कि अगर पहल सकारात्मक और सही इरादों से हुई हो तो चाहे रिश्ते कितने भी खराब क्यों न हों, पटरी पर लाए जा सकते हैं।

कश्मीर के हालात से होगा तय : दरअसल, पाक के भारत से कैसे रिश्ते होंगे, यह वहां की सरकार से अधिक सेना के रुख पर निर्भर रहता है। करतारपुर कॉरिडोर खुलवाने में पाक आर्मी प्रमुख कमर बाजवा ने भी भूमिका निभाई। हालांकि, जब तक पाक कश्मीर में आतंकवाद को शह देना बंद नहीं करता, तब तक इस तरह की पहल के कोई मायने नहीं रहेंगे

 
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