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Haryana

विधायक नैना चौटाला के जाने के बावजूद अभय चौटाला विधानसभा में विपक्ष के नेता रह सकते है – एडवोकेट हेमंत

November 19, 2018 10:05 AM

चंडीगढ़ - ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व वाली इनेलो पार्टी, जिसके वर्तमान में हरियाणा विधान सभा में18  सदस्यी विधायक दल के नेता उनके छोटे पुत्र अभय सिंह चौटाला है, जो सदन में विपक्ष के नेता भी हैं, में से अगर अलग  हुए गुट अजय चौटाला की पत्नी, नैना चौटाला, जो इनेलो पार्टी की सिरसा जिले  से डबवाली सीट से विधायक भी है, अगर स्वयं अलग हो जाती है या उन्हें पार्टी द्वारा निष्कासित कर दिया जाता है, तो यूं तो विधानसभा में इनेलो पार्टी विधायको की संख्या एक और घटकर 17  हो जायेगी, जो सदन में कांग्रेस पार्टी की मोजूदा संख्या के बराबर हो जाएगी, परन्तु इससे अभय चौटाला के नेता प्रतिपक्ष के पद पर कोई असर नहीं पड़ेगा. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया की सदन में विपक्ष के नेता का दर्जा माननीय स्पीकर महोदय द्वारा प्रदान किया जाता है. चूँकि अक्टूबर,2014  में हुए हरियाणा विधानसभा चुनावो में इनेलो पार्टी को 19  सीटें प्राप्त हुई थी जो भाजपा की 47  की संख्या के बाद सबसे अधिक थी, इसलिए इनेलो विधायक दल के नेता अभय चौटाला को नेता प्रतिपक्ष का पद स्पीकर महोदय द्वारा  दिया गया. इसके विपरीत कांग्रेस पार्टी को 15  सीट प्राप्त हुई हालाकि वर्ष 2016  में हरियाणा जनहित कांग्रेस के दो विधायको- कुलदीप बिश्नोई एवं रेणुका बिश्नोई द्वारा अपनी पार्टी का कांग्रेस में विधिवत विलय करने के बाद सदन में कांग्रेस के विधायको की संख्या 17  पहुँच गयी. एडवोकेट हेमंत ने बताया की अगर विधानसभा में दो दलों की सदस्य संख्या एक सामान हो, तो विपक्ष के नेता का चयन करने समय यह देखा जाता है कि पिछले आम चुनाव में दोनों पार्टियों में से किस पार्टी को अकेले  अधिक वोट प्रतिशत प्राप्त हुआ था. हेमंत ने कहा कि जब उन्होंने भारतीय चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ो से इस बाबत जानकारी प्राप्त की, तो उन्हें पता चला कि इसमें इनेलो पार्टी ने कांग्रेस  को पछाड़ दिया था. जहाँ इनेलो पार्टी को अक्टूबर, 2014  के विधानसभा चुनावो में 24.11 प्रतिशत वोट मिले वही कांग्रेस पार्टी को मात्र 20.58प्रतिशत मत ही प्राप्त हुए. इसलिए अगर इनेलो की सदस्य संख्या वर्तमान 18  से एक घटकर 17 हो जाती है, तो भी विपक्ष के नेता का पद अभय चौटाला के पास ही रहेगा. लिखने योग्य है कि इस वर्ष अगस्त माह के अंत में इनेलो के जींद से विधायक डॉ. हरि चंद मिढा के निधन के कारण उनकी सदन में सदस्य संख्या 19  से एक घटकर पहले ही  18 हो गयी है. एडवोकेट हेमंत ने इस बारे में एक पूर्व मिसाल के बारे में जानकारी देते हुए बताया की वर्ष2013 में तत्कालीन कर्नाटक विधानसभा आम चुनावो में भाजपा एवं जनता दल सेक्युलर दोनों को ही40-40 सीटें प्राप्त हुई थी परन्तु जब नेता प्रतिपक्ष के लिए दोनों पार्टियों के मत प्रतिशत को देखा गया को एक क्षेत्रीय दल होने के बावजूद जनता दल सेक्युलर को सदन में विपक्ष के नेता का पद मिला क्योंकि इस पार्टी को उक्त चुनावो में 20.19 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे जबकि एक राष्ट्रीय पार्टी होते हुए भी भाजपा को केवल 19.89 प्रतिशत वोट ही हासिल हुए थे. हेमंत ने कहा की अगर नैना चौटाला के अलावा उनके गुट के दो और विधायक भी इनेलो विधायक पार्टी से अलग हो जाते हैं, तो ऐसी परिस्थिति में इनेलो के विधायक दल की संख्या 15  हो जायेगी जो मूल रूप से कांग्रेस पार्टी की संख्या के बराबर हो जायेगी. अब ऐसे में यह स्पीकर महोदय  के विवेकाधिकार पर होगा कि क्या वो कांग्रेस विधायक दल के नेता को यह पद देते है, जिसकी मूल संख्या तो 15  थी परन्तु हरियाणा जनहित कांग्रेस के विलय के बाद यह 17 हो गयी या फिर इनेलो पार्टी के नेता के पास ही यह पद रहने देते है.

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