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Haryana

ऐडॅलेस्अन्ट डिप्रेशन एंड एडीक्शन पर हेल्थ अवेयरनेस टॉक आयोजित

October 27, 2018 08:49 AM

 ऐडॅलेस्अन्ट डिप्रेशन एंड एडीक्शन पर एक हेल्थ टॉक, डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल, पुलिस लाइंस पंचकूला में आयोजित की गई। आईवी अस्पताल, पंचकुला द्वारा डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल के सहयोग से हेल्थ टॉक का आयोजन किया गया था।

चारू बाली, कमिश्नर ऑफ पुलिस, पंचकूला, मुख्यातिथि के तौर पर उपस्थित थीं। इस मौके पर स्कूल प्रिंसिपल, वंदना त्रिपाठी भी उपस्थित थीं।

हेल्थ टॉक को संबोधित करते हुए, डॉ.करण धवन, एमडी साइक्रेटी, आईवी हॉस्पिटल, पंचकूला ने कहा कि आज की दुनिया में जहां एकल परिवार काफी आम हैं, दोनों माता-पिता की काफी व्यस्त दिनचर्या होती है और ऐसे में बच्चों को इन व्यस्त माता-पिता द्वारा नौकरियों और सहायकों की सहायता से पाला जा रहा है, जो कि हमारे देश की सांस्कृतिक प्रथाओं के विपरीत है। इससे बच्चों के बीच विभिन्न मनोवैज्ञानिक समस्याएं हुई हैं।

उन्होंने कहा कि इन दिनों बच्चों पर परीक्षाओं में अच्छे अंक लाने का दबाव बढ़ गया है और माता-पिता की ऊंची उम्मीदें, उन पर दबाव डाल रही हैं। सहपाठियों से आगे निकलने का दबाव, सहकर्मी स्वीकार्यता और अलगाव के डर के कारण दोस्तों और सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने की आवश्यकता किशोरों के बीच तनाव का स्तर बढ़ा रही है। डॉ.धवन ने कहा कि बच्चों की बदलती जीवन शैली का भी असर है, जिसमें वे वे टेलीविजन, लैपटॉप और फोन पर अधिक चिपके हुए हैं लेकिन शायद ही कभी खेल के मैदान में जाते हैं। इन सब के चलते किशोरावस्था में अवसाद जैसी मनोवैज्ञानिक समस्याओं के मामले बढ़े हैं।

इन समस्याओं की पहचान कैसे करें, इस बारे में बात करते हुए डॉ. धवन ने कहा कि यदि आपके बच्चे का कक्षा में पढ़ाई संबंधित प्रदर्शन खराब हो रहा है, और वह अधिक गुस्से में और चिड़चिड़ा रहने लगा है। वहीं साथ ही शरीर में अलग अलग जगह पर दर्द हो रहा है जैसे कि विशेष रूप से सिरदर्द, नींद में परिवर्तन और खाने का व्यवहार, एकाग्रता की कमी, बात नहीं करना माता-पिता के साथ बहुत अधिक समय और घर से बाहर निकलता है तो इसका मतलब है कि आपके बच्चे पर ध्यान देने की जरूरत है।

माता-पिता को अपने बच्चों के मित्र होने और अपने बच्चे के साथ समय बिताने की जरूरत है। अनावश्यक रूप से ना डांटें, अपनी अपेक्षाओं को सीमित करें और उनके लिए प्राप्त होने योग्य लक्ष्यों को निर्धारित करें और माता-पिता बच्चों के सामने लडऩे से बचें। डॉ.धवन ने कहा कि यदि अभी तक ये उपाय स्थिति सुधारने या संभालने में असफल होते हैं, तो किसी को मनोचिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

 
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