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सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को नजरअंदाज करते हुए हुड्डा सरकार ने हरियाणा पुलिस एक्ट, 2007 में डीजीपी का कार्यकाल एक वर्ष किया था

September 24, 2018 12:41 AM

रमेश शर्मा

 चंडीगढ़ - सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए तत्कालीन हुड्डा सरकार ने हरियाणा पुलिस एक्ट, 2007 में डीजीपी का  न्यूनतम कार्यकाल एक वर्ष किया था जबकि सुप्रीम कोर्ट ने सितम्बर 2006 में ही इसे दो वर्ष करने का निर्देश दिया था। गौरतलब है कि सुप्रीमकोर्ट ने “प्रकाश सिंह बनाम भारत  सरकार”  मामले में सितम्बर, 2006 में दिए गए अपने ऐतिहासिक निर्णय में पुलिस सुधारों में हर राज्य के डीजीपी का कार्यकाल कम से कम दो वर्ष करने का ही आदेश दिया था। पडोसी राज्य पंजाब के पुलिस एक्ट, 2007 में आरम्भ से यह अवधि न्यूनतम दो वर्ष निर्धारित है। हरियाणा के वर्तमान पुलिस महानिदेशक 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी बलजीत सिंह संधू इसी माह 30 सितम्बर को सेवानिवृत होने वाले है। सूत्रों के अनुसार हरियाणा की खट्टर सरकार ने इस सम्बन्ध में केंद्र सरकार को लिख कर उन्हें इस पद पर कुछ और माह का सेवा-विस्तार (एक्सटेंशन) करने के लिए स्वीकृति प्रदान करने की मांग की है।हालाकि यह भी चर्चा है कि सरकार संधू की कार्य शैली को देखते हुए उन्हें अगले वर्ष अप्रैल, 2019 तक अर्थात सात माह का एक्सटेंशन देना चाहती है क्योंकि तब तक वह इस पद पर दो वर्ष पूरे कर लेंगे। ज्ञात रहे कि लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व अप्रैल, 2017 में डॉ. केपी सिंह के स्थान पर संधू को राज्य पुलिस प्रमुख लगाया था। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार के अनुसार  इससे पूर्व डॉ. केपी सिंह को अप्रैल, 2016 में राज्य का पुलिस महानिदेशक लगाया गया था वह भी ठीक एक वर्ष तक इस पद पर रहे। लिखने योग्य है कि सिंह से  पूर्व मौजूदा खट्टर सरकार ने यश पाल सिंघल को जनवरी, 2015  में डीजीपी लगाया था एवं इस प्रकार वो एक वर्ष तीन महीने इस पद पर रहे।उन्हें जाट आदोलन में राज्य पुलिस की कथिक निष्क्रियता की वजह से हटाना पड़ा। सिंघल से पहले एसएन वशिष्ट राज्य के पुलिस मुखिया थे जिन्हें पूर्व की भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार ने नवम्बर,2012 में डीजीपी नियुक्त किया था। ज्ञात रहे कि वशिष्ट से पहले आरएस दलाल पूरे साढे छह वर्ष तक राज्य के डीजीपी रहे थे। बहरहाल, चूँकि विगत  दिनों केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अंतर्गत आने वाली केंद्रीय कैबिनेट की नियुक्ति सम्बन्धी समिति ने पहले 28  अगस्त, 2018  को महाराष्ट्र के डीजीपी ( राज्य पुलिस प्रमुख) डीडी पडसलगीकर एवं इसके बाद गत 11 सितम्बर को पंजाब के डीजीपी सुरेश अरोड़ा दोनों को उनकी सेवानिवृति के तत्काल पश्चात  तीन-तीन महीने का सेवा विस्तार प्रदान किया है,अत: इसी का अनुसरण करते हुए संधू को भी तीन माह का ही एक्सटेंशन प्राप्त हो सकता है।जहाँ महाराष्ट्र के उक्त पुलिस प्रमुख पडसलगीकर गत 31 अगस्त को रिटायर होने वाले थे, वहीँ पंजाब के पुलिस मुखिया अरोड़ा की इस माह 30 सितम्बर को  सेवानिवृति निश्चित थी परन्तु  अब दोनों अपने वर्तमान पद पर क्रमश: नवम्बर एवं दिसम्बर माह तक बने रहेंगे।ज्ञात रहे कि यह दोनों ही 1982 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। इन दोनों को केंद्र सरकार ने अखिल भारतीय सेवाएँ (मृत्यु एवं सेवानिवृति लाभ) नियमावली, 1958  के वर्तमान नियम 16(1) के अंतर्गत छूट प्रदान करते हुए जन हित में तीन-तीन माह का सेवा एक्सटेंशन दिया है। इस सबके बीच एडवोकेट हेमंत ने हरियाणा के मुख्यमंत्री से अपील की है कि अगर वो संधू को एक्सटेंशन देने बारे में वाकई गंभीर है, तो सरकार को केंद्र से इस बाबत एक्सटेंशन का आदेश की प्रतीक्षा करने के बजाये इस सम्बन्ध में हरियाणा पुलिस अधिनियम, 2007 की धारा 6(2) में संशोधन कर राज्य के डीजीपी के कार्यकाल को वर्तमान में निर्धारित न्यूनतम एक वर्ष के बढाकर दो वर्ष कर देना चाहिए, चाहे उस अधिकारी की सेवानिवृति की तिथि कोई भी हो। केंद्र सरकार अधिकतम तीन माह का ही संधू को सेवा विस्तार प्रदान कर सकता है। हेमंत ने बताया है कि यह संशोधन एक अध्यादेश की मार्फ़त तत्काल रूप से लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा किया जाता है तो इससे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी अवहेलना नहीं होगी और संधू की एक्सटेंशन के लिए केंद्र के आदेशों का भी इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

 
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