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National

*चिंतनशाला*

August 29, 2018 03:44 PM

समाज के मध्य-निम्न वर्गीय युवा तेजी से अपराध की दुनिया में जा रहा है। इसका बड़ा कारण इन युवाओं के पास काम का न होना माना जा सकता है। ऐसे युवाओं के सपने बड़े होते है, जिनको ये रातोरात पूरा करना चाहते हैं। बस, इसी सोच का बड़े अपराधी फायदा उठाते हैं। इस स्थिति का साईड इफैक्ट यह होता है कि जो युवा काम करना चाहते हैं, उनको अपराध की दुनिया के युवा सपने दिखा कर अपने साथ जोड़ लेते हैं। इस तरह अपराध की चेन बनती चली जाती है। काम न होने के कारण ऐसे युवा बंद पड़ दुकानों या मकानों के चबुतरों पर कहीं भी बैठे मिल जायेंगे, अपना मोबाईल कान से लगाए हुए। हर किसी को खिज कर बोलना और बदतमीजीपूर्ण व्यवहार इनकी विशेषता है। तनाव इनके चेहरों पर साफ देखा जा सकता है। आधी छांव वाले चबुतरों पर दिन गुजार कर ये रात को क्या करते हैं, यह बताने की जरूरत नहीं। सोचने वाली बात यह भी है कि अब चुनाव आ रहे हैं और प्रत्याशी ऐसे युवाओं से सम्पर्क साधना शुरू कर देंगे। ऐसे में ये अपराधिक प्रवृति के युव नए अवतार में नजर आने वाले हैं। क्या समाज की इस युवा पीढी के लिए कोई नई राह बनाने का प्रयास करेगा? क्या पुलिस बंद दुकान और मकानों के चबुतरों पर बैठने वाले युवाओं पर ध्यान देगी?

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