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HARYANA मंत्री के कहने के बाद भी पशुओं के लिए नहीं भरे जा सके तालाब

June 16, 2018 05:25 AM

COURSTEY DAINIK BHASKSR JUNE 16

मंत्री के कहने के बाद भी पशुओं के लिए नहीं भरे जा सके तालाब

समस्या | सासरौली में जलसंकट के चलते लोग पशु बेचने पर मजबूर, विभाग का दावा 54 में से 41 तालाबों को भरा गया, नहर आने से पहले ली गई थी मीटिंग

भास्कर न्यूज | झज्जर

 

भीषण गर्मी के बीच 5 दिन पूर्व हुई बारिश से भी लोगों को राहत नहीं मिल सकी है। जबकि नहर आने से पहले मंत्री ने विशेष रूप से बैठकर अफसरों को जलघरों व तालाबों को भरने के सख्त निर्देश दिए थे। अब हालत यह है नहर बंद हो चुकी है और ग्रामीण क्षेत्र में बने वाटर टैंकों में पर्याप्त पानी नहीं है। वहीं दूसरी ओर पशुओं के तालाब खाली है। सासरौली में जलसंकट के कारण लोग अपना पशुधन बेचने पर मजबूर हो रहे हैं।
पिछले महीने कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने ग्रामीणों की ओर से आ रही पीने के पानी और पशुओं के तलाब खाली रहने की शिकायत पर अफसरों की बैठक ली थी। उन्होंने दोनों ही समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब नहर बंद हो चुकी है और पानी उपलब्ध होने में अभी कई दिन शेष है। दरअसल पानी उपलब्ध करने की इस व्यवस्था में मुख्य भूमिका सिंचाई विभाग की थी, लेकिन अब विभाग का कहना है कि वे केवल अपनी माईनर के टेल तक ही पानी उपलब्ध करा सकते थे और वह कराया भी गया है। किसी भी गांव के तलाब भरने की जिम्मेदारी वहां के सरपंच या ग्राम पंचायत की थी। इस बीच समस्या यह रही कि कहीं आगे कच्चा खाली दुरुस्त नहीं था, तो कुछ जगह पंचायती राज विभाग की ओर से पाइप दबाए गए। उनको लेवल ठीक नहीं मिला, जिसके कारण अब क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांव के तालाबों में पानी नहीं आ सका।
दो साल से नहीं भरा तालाब : सरपंच
ब्लाॅक मातनहेल के गांव सासरौली के खेतों में बने मानवाला जोहड़ सूखा है। इसके कारण पशुओं के लिए पीने के पानी का संकट गहरा हुआ है। खेतों में बणी के साथ बने तालाब में पशुपालकों के अलावा दूसरे लावारिस पशु पानी पीते हैं। ग्रामीण हरिओम, सरपंच देवेन्द्र सिंह ने बताया कि कि नहर से जोहड़ तक नाला पक्का बन हुआ है। इसके बावजूद तलाब में पानी न होने की समस्या दो साल से है। समस्या को लेकर आल अधिकारियों से मिल चुके है, लेकिन अभी तक समस्या का कोई समाधान नहीं हो पा रहा है। गांव के 40 फीसदी ग्रामीण खेतों में रहते हैं और पशुपालन का धंधा करते हैं।
झज्जर. सासरौली गांव का मानवाला जोहड़ िजसे जलभराव का इंतजार।
भरा था लेकिन सूख गया : एसडीओ
इस मामले में एसडीओ संदीप मलिक का कहना है कि उनके सब डिविजन में 19 तालाब है। सभी को टर्न वाइज भर दिया गया था, सासरौली में दो तालाब को भरा गया था। एक गांव वाले तालाब को व दूसरे खेतों वाले तालाब को। लेकिन खेतों में जो तालाब है वह वाटर रीचाजिंग के लिए है। रेतीला क्षेत्र होने के कारण अब वह सूख गया है। वैसे भी मंत्री ने रीचार्जिंग वाले तालाबों को भरने के लिए नहीं कहा था।
डिवीजन में 41 तालाब भरने का दावा
सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि झज्जर डिवीजन के तहत 54 तालाब है। इनमें से 41 को पिछले एक महीने के दौरान भरा गया। जो तलाब नहीं भरे गए। इनके पीछे दूसरे कारण रहे।
सिकेंद्रपुर व बाजीतपुर में पाइप की समस्या
विभागीय अधिकारियों का कहना है सिकेंद्रपुर व बाजीतपुर में टेल तक पानी दिया गया, लेकिन आगे ग्राम पंचायत ने रुचि नहीं दिखाई, जिसके कारण पानी खेतों में चलता रहा। जानकारों का कहना है कि पहली बार तालाबों में पानी सुनिश्चित करने के लिए पाइप लाइन डाली गई, लेकिन इनका लेवल ठीक न होने से समस्या बनी

 
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