Tuesday, March 19, 2019
Follow us on
BREAKING NEWS
प्रदेश में युवाओं के बराबर देंगे महिलाओं को रोजगार- नैना चौटालाचुनाव चिन्ह जेजेपी को मिला और जूतम-पैजार हो रहे हैं विरोधी-दुष्यंत चौटालाहरियाणा रोडवेज बस कर्मचारी ने अम्बाला (बलदेव नगर)बस रोकने से मानना किया ,बोले उनके पास परमिशन है,यात्री हुए परेशानलोकसभा आम चुनाव 2019 में आदर्श आचार संहिता के दौरान किसी भी उम्मीदवार या राजनैतिक पार्टियों द्वारा विज्ञापन सामग्री को प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में छपवाने या प्रसारण के लिए देने से पूर्व मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (एम.सी.एम.सी) से सर्टिफिकेट प्राप्त करना अनिवार्य:डॉ. इन्द्रजीत सर्विस वोटर के लिए फार्म नम्बर-2, 2ए और 3 भरना अनिवार्य: मुख्य चुनाव अधिकारी राजीव रंजनपहले काम करने नहीं दिया और...कर दिया तो अब मिटाने पर तुले हैं- दुष्यंत चौटालाचौधरी ओमप्रकाश चौटाला को लेकर सुभाष बराला की टिप्पणी अपमानजनक, चुप क्यों है इनेलो – दिग्विजय चौटालानीदरलैंड: उट्रेक्ट में हमले के बाद हाई अलर्ट जारी
National

शिक्षा पैदा कर रही है इंडिया और भारत

June 01, 2018 09:21 PM

परिणामों के दिन चल रहे हैं, एक तरफ 10वीं, 12वीं के अलग-अलग बोर्डस जैसे सीबीएससी, हरियाणा बोर्ड, पंजाब बोर्ड परिणाम घोषित कर रहे हैं तो दूसरी तरफ प्रोफेशनलस परीक्षाएं जैसे जेईई तथा नीट, इंजीनियरिंग व मैडिकल के लिए प्रवेश परीक्षाओं के परिणाम हैं तथा तीसरी तरफ चुनावों के तथा उपचुनावों के परिणाम घोषित हो रहे हैं। स्कूली परिणामों में जिस तरह से छात्र-छात्राएं अंकों से झोलियां भर-भर कर ला रहे हैं, उससे लगता है कि शिक्षा की गुणवत्ता तथा उसका स्तर बड़ रहा है। लेकिन क्या यथार्थ में हमारे 90 प्रतिशत, 95 प्रतिशत या 99 प्रतिशत अंक लाने वाले छात्र प्रतिभा सम्पन्न तथा व्यवहारिक ज्ञान में अव्वल हैं? आज परीक्षाएं एक तकनीक बन गई हैं तथा रटन्तु तोतों की कतार खड़ी की जा रही है। एक तरफ बड़े-बड़े शहरों के सुविधा सम्पन्न वातानुकूलित स्कूलों के परिणाम हैं तो दूसरी तरफ गांवों में जहां अध्यापक तथा छात्र, दोनों के लिए न बैठने का स्थान है, न कोई इन्फ्रास्ट्रक्चर, मिड-डे स्कूलों के नाम से जाने जाने वाले ये सरकारी स्कूलों के परिणाम, दोनों की तुलना बेमानी है। इस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था समाज में एक अलग तरह की वर्ण व्यवस्था खड़ी कर रही है। शिक्षा के अवसरों की उपलब्धता, शिक्षा प्रणाली तथा जिस तरह की शिक्षा छात्रों को दी जा रही है तथा उनके मूल्यांकन की व्यवस्था, समाज में दो वर्ग बना रही है, एक वे जो ऊंचे ओहदे व ऊंचे रोजगार के योग्य बनेंगे यानि की ईलाइट तथा दूसरे जो मंहगी तथा भ्रष्ट शिक्षा लेकर भी शुरू से ही पिछड़े हो जाएंगे यानि बेरोजगारों की लम्बी लाइनों को और लम्बा कर हाशिये की तरफ धकेले जा रहे हैं।

शिक्षा तथा स्वास्थ्य दो ऐसे क्षेत्र हैं, जिसे निजी क्षेत्र के जिम्मे छोड़ा जाना, सरकारों तथा समाज को महंगा पड़ सकता है। विश्व के अग्रणी देशों में, सभी विकसित देशों में 10वीं तथा 12वीं तक शिक्षा का जिम्मा सरकारी क्षेत्र का है। विश्वविद्यालय तथा ऊंची शिक्षा के क्षेत्र में प्राइवेट सैक्टर के संस्थानों का वर्चस्व है। पहले पब्लिक व प्राइवेट स्कूलों का पिछली सदी में इतना चलन नहीं था, तब सिर्फ सरकारी स्कूल ही थे, ज्यादातर अफसर, ऊंचे ओहदों के अधिकारी सब सरकारी स्कूलों के ही पढ़े हुए होते थे। आज जो मध्यम वर्ग है वह इन्ही सरकारी स्कलों की ही उपज है। लेकिन सरकारी स्कूलों की साख तथा गुणवत्ता में इतनी गिरावट आयी है कि आज काम वाली बाई या दिहाड़ी वाला मजदूर भी अगर इन सरकारी स्कूलों में बच्चे भेज रहे हैं तो सिर्फ बेबसी में या मिड-डे-भोजन के लालच में। अनिवार्य शिक्षा के तहत, यह भी चलो अच्छा है, पर सोचों समाज व आने वाली पीढियों का क्या होगा? अमेरिका, जोकि निजी क्षेत्र का पक्षधर है, प्राइवेट सैक्टर, जहां सब क्षेत्रों में आगे हैं, उसमें भी शिक्षण व अनुसंधान के क्षेत्र में सरकारी क्षेत्र का योगदान अनिवार्य है। उदाहरण के तौर पर अमेरिका  की एपल कम्पनी जोकि आईफोन बनाती है, उसमें प्रयोग की जाने वाली सारी तकनीकें जैसेकि इंटरनेट, टच स्क्रीन, माइक्रोप्रोसेसर, सब पहले वहां डिफेंस डिपार्टमैंट के रिसर्च विभाग ने खोजी। इन्वेंशन सरकारी क्षेत्र में हुई, इनोवेशन यानि उसका कमर्शियल उपयोग निजी क्षेत्र की कम्पनियों ने किया, बाद में उत्पादन तथा वितरण की व्यवस्था निजी कम्पनियों ने प्राईवेट स्कूलों में भी की।

ज्यादा पैसा सरकार की ग्रांट से आया हुआ होता है। सिंगापुर आज विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में खड़ा है, क्योंकि उन्होंने एक बेहतरीन शिक्षा व्यवस्था खड़ी की है। निजी क्षेत्र हो या सरकारी क्षेत्र, देश में स्कूली शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाने जरूरी हैं, अन्यथा वो दिन दूर नहीं, जब देश दो वर्गों में विभाजित हो जाएगा - एक सुविधा सम्पन्न तथा दूसरा साधन विहीन सर्वहारा वर्ग। जैसकि वर्तमान में हम देख रहे हैं एक इंडिया और दूसरा भारत। मोदी जी ने हाल ही में कहा कि हमारे राज में देश बदल रहा है। काश यह बदलाव साकारात्मक हो भारत व इंडिया में कोई अन्तर न रहे। यह तभी सम्भव है जब शिक्षा के क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन हो, हमारी शिक्षा रोजगार उन्मुखी तो बने ही, हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध भी हो तथा सब को अपनी प्रतिभा व गुणों के विकास के समान अवसर मिलें।

अंत में ‘मत जिओ सिर्फ अपनी खुशी के लिए, कोई सपना बुनो जिंदगी के लिए

पोंछ लो दीन दुखियों के आंसू अगर, कुछ नहीं चाहिए और बंदगी के लिए।’  

डा० क कली

 

 
Have something to say? Post your comment
 
More National News
पणजी: मनोहर पर्रिकर का अंतिम सस्कार किया गया गोवा: गडकरी बोले- सीएम बीजेपी का ही होगा, हम सहयोगियों के संपर्क में हैं पणजी: मनोहर पर्रिकर की अंतिम यात्रा जारी, उमड़ा जनसैलाब पणजी: मनोहर पर्रिकर को अंतिम विदाई देते हुए भावुक हुईं स्मृति ईरानी पणजी: थोड़ी देर में होगा मनोहर पर्रिकर का अंतिम संस्कार पर्रिकर के अंतिम दर्शन को उमड़ा गोवा, PM ने दी श्रद्धांजलि BJD प्रमुख नवीन पटनाटक ने 9 लोकसभा उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर आज PC करेगा आयकर विभाग जब वोट दें तो देश का ध्यान रखें, राहुल को मजबूत करें: प्रियंका BJP बोली- 2 बजे गोवा CM का ऐलान, 3 बजे शपथ, राजभवन पहुंची कांग्रेस